देवास : 22 स्कूलों के प्राचार्य को थमाया शोकाज नोटिस

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देवास। जब परीक्षा परिणाम एते है ,तो वे सिर्फ अंकतालिका नहीं होते – वे उस पूरे साल की मेहनत, लगन और जवाबदेही का आईना होते है। लेकिन देवास जिले के 22 सरकारी स्कूलों में यह आईना इस बार बेहद धुंधला नजर आया। सत्र 2025-26 में इन विधालयो का 10वी और 12वी का परीक्षा परिणाम 30% से भी कम रहा और अब इसके लिए जवाब देने की बारी है उन प्राचार्यो की, जिनकी देखरेख में यह हाल हुआ।

कलेक्टर ने कसी नकेल

कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने 1 जून 2026 को शिक्षा विभाग की कड़ी समीक्षा बैठक बुलाई। बैठक में एक-एक प्राचार्य से सीधा सवाल किये गए – वन-टू-वन जवावदेही। जिन 22 शासकीय विधालयो का परिणाम 30% के निचे रहा ,उन सभी प्राचार्यो को शोकाज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।

यह सिर्फ एक नोटिस नहीं है- यह एक कड़ा सन्देश है की सरकारी तंत्र में “चलता है ” की मानशिकता नहीं चलेगी।

कन्या महारानी स्कूल भी जाँच के दायरे में

देवास शोकाज नोटिस

बैठक में शासकिय कन्या महारानी चिमना बाई उच्चत्तर माध्यमिक विधालय का मामला भी उठा। यह विधालय शहर का एक प्रमुख बालिका शिक्षा केंद्र है -लेकिन इस बार यहाँ के नतीजे भी संतोषजनक नहीं रहे। शिक्षा में बेटियो की भागीदारी को बढ़ावा देने की जीतनी बाते होती है ,उतनी ही जरुरी है की उन्हें पढाने वाला तंत्र भी जिम्मेदार हो।

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सरकारी शूल और असलि सवाल

देवास जिले के सरकारी स्कूलो में पढ़ने वाले बच्चे ज्यादातर उन परिवार से आते है, पप्रावेट स्कूल की फीस नहीं भर पाते है,इसीलिए ये बच्चे सरकारी स्कूल में जाते है ,क्योकि इनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होता। जब ऐसे स्कूलो का परिणाम 30% के निचे आता है तो असल में नुकसान उन बच्चो का होता है जिसने पूरे साल उम्मीद लगाए बैठा था।

जवाबदेही सही दिशा में लेकिन…….

कलेक्टर की यह कारवाही निसंदेह सकारात्मक कदम है। जब पशासन सख्त होता है ,तो तंत्र हिलता है। लेकिन असली सुधार तब होगा जब यह जवाबदेही सिर्फ नोटिस तक सिमित न रहे। जरीरत है –

  • नियमित शिक्षक उपस्थिति की निगरानी
  • पाठ्क्रम समय पर पूरा करने की बाध्यता
  • छात्रो की नियमित परीक्षा और कमजोर बच्चो के लिए विशेष कक्षाएं
  • अभिभावकों को भी जोड़ना – ताकि घर और स्कूल मिलकर बच्चे का भविष्य सँवारे

आगे की राह

शोकाज नोटिस एक शुरुआत है। देखना यह होगा की इन नोटिस का क्या हश्र होता है ? क्यों दोषि प्राचार्य पर करवाई होगी ? क्या अगले सत्र में देवास के सरकारी स्कूलों के नतीजे बेहतर होंगे ? इन सवालो का जवाब वक्त देगा – लेकिन देवास के छात्र ,उनके माता -पिता और समाज अब जाग रहा है।

शिक्षा से बड़ा कोई निवेश नहीं होता है। और उस निवेश की रक्षा करना – हर प्राचार्य ,हर शिक्षक और हर अधिकारी की जिम्मेदारी है।

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